Friday, February 10, 2012

तमन्ना....



पंख फैलाये वह उड़ना चाहता है,
आसमान की उदारता जानना चाहता है,
थोडा चलता फिर रुक जाता है,
पलट के तुम्हारी ओर देखता है,
क्यूँ तुम हो नाराज़ उससे,
तुम्हारी इच्छा  भी तो यही है,
साहस बढाओ और उड़ने दो उसे,
रास्ता नया पर मंजिल तो वही है,
आखिर वह सिर्फ पंख फैलाये उड़ना चाहता है,
आसमान की उदारता जानना चाहता है!

P.S : This is my first ever Hindi poem.Rather an attempt at it! :-)

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